Sunday, January 3, 2010

चलते रहो



गमों के सायेमें गम से घबराना क्या,
जीवन के सफर में रोना क्या औंर हसना क्या,
बस चलते रहो, राहों को बनाते रहो,
फिर मन्जिल की आस में जीवन गुजर जाए तो क्या!


15 July 2009
Kathmandu 

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